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फरार इनामी तहसीलदार सस्पेंड, चुनावी ड्यूटी बीच में छोड़कर हुआ था फरार

चंडीगढ़ : भ्रष्टाचार के मामले में फंसने के बाद पिछले चार महीने से फरार चल रहे तहसीलदार मंजीत मलिक को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार तहसीलदार मलिक के सस्पेंड आदेश जारी करते हुए उसे अंबाला के डीसी कार्यालय में अटैच किया या है। बता दें कि रिश्वतखोरी के मामले में पिछले चार महीने से फरार चल रहे तहसीलदार को पकड़ने के लिए इनाम तक घोषित किया जा चुका है।

यह मामला तब और चर्चा में आ गया था जब फरार होने के बावजूद सरकार ने मंजीत का ट्रांसफर कैथल के गुहला से तोशाम विधानसभा क्षेत्र में कर दिया था।

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मलिक पर फरवरी महीने में एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। ब्यूरो की टीम ने छापेमारी कर उसके क्लर्क को रंगे हाथों पकड़ा था, लेकिन तहसीलदार को भनक लगते ही वह फरार हो गया। हैरानी की बात यह है कि उस वक्त मलिक की ड्यूटी नगरपालिका चुनाव में बतौर असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर लगी थी, लेकिन वह उसे बीच में ही छोड़कर भाग निकला। तब से वह अंडरग्राउंड हैं।

’10 रुपए का टिकट’ कोड

इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायतकर्ता विजय कुमार से हुई थी। कैथल के चीका के वार्ड-3 निवासी विजय कुमार ने एंटी क्रप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी कि उन्होंने चीका की अमर सिटी कॉलोनी में 151 गज का प्लॉट खरीदा था। वह अपनी भाभी के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री करवाना चाहते थे। उन्होंने सारे कागज तैयार कर 23 जनवरी 2025 का समय लिया था।

विजय कुमार ने बताया था कि जब वह अपनी भाभी के साथ रजिस्ट्री क्लर्क प्रदीप कुमार से मिले तो क्लर्क ने कहा कि पहले तहसीलदार से मिलो। जब वह तहसीलदार के पास गए, तो तहसीलदार ने क्लर्क प्रदीप को कागजात देखने के बाद कहा कि ‘कागजात ठीक हैं, इस पर 10 रुपए की टिकट लगाकर रजिस्ट्री करा लो।’ विजय ने जब क्लर्क प्रदीप से पूछा कि 10 रुपए की कौन सी टिकट लगनी है, तो क्लर्क ने साफ कहा, “10 रुपए की टिकट का मतलब 10 हजार रुपए है।”

विजय ने कहा कि वह इसकी शिकायत लेकर सीधे तहसीलदार मलिक के पास गए। उन्होंने तहसीलदार को बताया कि रजिस्ट्री क्लर्क 10 हजार की रिश्वत मांग रहा। यह सुन तहसीलदार मलिक भड़क उठा। उसने कहा इस खेवट पर स्टे है और इसकी रजिस्ट्री नहीं होगी। तहसीलदार ने बिना कोई ठोस कारण बताए उसका रजिस्ट्री का टोकन भी रद्द कर दिया।

विजय कुमार ने बाद में खेवट से संबंधित सारे कागजात चेक किए तो पाया कि उस पर कोई स्टे नहीं था। वह 6 फरवरी 2025 को फिर तहसीलदार से मिले और बताया कि खेवट पर कोई स्टे नहीं है। तहसीलदार ने फिर से उन्हें क्लर्क प्रदीप से मिलने को कहा। जब वह प्रदीप के पास गए, तो उसने रजिस्ट्री के एवज मंप फिर से 10 हजार रुपए नकद रिश्वत की मांग की। इससे परेशान होकर विजय ने एंटी क्रप्शन ब्यूरो को शिकायत कर दी।

क्लर्क पकड़ा गया

विजय की शिकायत मिलने के बाद एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने 18 फरवरी को गुहला तहसीलदार के दफ्तर में जाल बिछाया। इस दौरान रजिस्ट्री क्लर्क प्रदीप कुमार को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। क्लर्क ने यह रिश्वत रजिस्ट्री के बदले मांगी थी। क्लर्क से पूछताछ में पता चला कि रिश्वतखोरी में तहसीलदार मंजीत मलिक भी शामिल है। तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री कराने वालों से रिश्वत वसूलने के लिए गुप्त कोड तैयार किया था। अगर किसी से रिश्वत लेनी होती तो उसकी रजिस्ट्री पर ’10 रुपए का टिकट लगाने’ के लिए कहा जाता था। इसका सीधा मतलब होता था कि काम करवाने को 10 हजार रिश्वत देनी पड़ेगी।

ड्यूटी छोड़ भागा था तहसीलदार

जिस वक्त यह कार्रवाई की गई, उस वक्त तहसीलदार मलिक को चुनाव आयोग ने सीवन नगर पालिका चुनाव में सहायक रिटर्निंग अधिकारी (एआरओ) और नोडल अधिकारी के तौर पर तैनात किया था। मगर, जैसे ही रेड की भनक लगी, तहसीलदार चुनावी ड्यूटी भी बीच में ही छोड़कर भाग गया। उसने उच्च अधिकारियों को इसकी कोई सूचना नहीं दी और न ही कोई आधिकारिक छुट्टी ली थी।

इनामी घोषित हुआ फरार तहसीलदार

तलाश के दौरान तहसीलदार का कुछ पता नहीं चला। तहसीलदार ने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया। तब से तहसीलदार अंडरग्राउंड है। उसे पकड़ने के लिए ब्यूरो की ओर से तहसीलदार का पता बताने वाले को 20 हजार का इनाम देने का ऐलान किया है।

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