चंडीगढ़ : हरियाणा में राज्यसभा सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला को सहायक महाधिवक्ता (AAG) के पद नियुक्त किए जाने के बाद शुरू हुए सियासी संग्राम के बीच सरकार ने अब अपने फैसले को पलट दिया है। सरकार ने अपने फैसले पर यूटर्न लेते हुए विकास बराला की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। अब वे एएजी के पद पर ज्वाइन नहीं कर सकेंगे। विकास बराला के खिलाफ पूर्व आईएएस की बेटी का पीछा करने व अपहरण की कोशिश का मामला चंडीगढ़ अदालत में विचाराधीन है।
दिल्ली में हुई थी नियुक्ति
हरियाणा सरकार की ओर से 18 जुलाई को 95 से ज्यादा विधि अधिकारियों की सूची जारी की गई थी, जिनमें विकास बराला का भी नाम शामिल था। उन्हें दिल्ली स्थित एडवोकेट जनरल के दिल्ली कार्यालय में सहायक महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति का नाम सामने आने के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में छा गया था। इस दौरान रिटायर्ड आईएएस ने इस पर आपत्ति जताते हुए सीएम को पत्र लिखकर विकास बराला की नियुक्ति को रद्द करने का अनुरोध किया था।
वर्णिका कुंडू ने उठाए थे सवाल
पूर्व IAS अधिकारी वीएस कुंडू की बेटी वर्णिका कुंडू ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक सख्त पोस्ट डालकर सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने लिखा था कि यह निर्णय सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों के विपरीत है और इससे गलत संदेश जाता है।
पार्टी के अंदर भी उठे थे सवाल
विकास बराला की नियुक्ति को लेकर हरियाणा भाजपा के भीतर भी मतभेद उभर आए थे। कई नेताओं ने कहा कि सरकार को केस का फैसला आने तक इंतजार करना चाहिए था। वहीं कुछ नेताओं ने तर्क दिया कि लंबा चलने वाला मुकदमा किसी की योग्यता पर असर नहीं डालना चाहिए। विकास की नियुक्ति से पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है। एक तरफ हम बेटियों की सुरक्षा की बात करते हैं, और दूसरी तरफ ऐसे आरोपी को जिम्मेदारी देते हैं। हर फैसले से एक संदेश जाता है, जो फैसले से ज्यादा अहम होता है।




